सर्वार्थसिद्धि योग में 15 जून,को मनेगी इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या

सोमवती अमावस्या 15 जून,सोमवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है, जो सुख-सौभाग्य, पितृ दोष मुक्ति और अखंड सौभाग्य के लिए विशेष फलदायी है।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की यह इस साल की पहली सोमवती अमावस्या है ।इस अधिकमास की सोमवती अमावस्या को भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी साथ मिलकर शिव-शक्ति की आराधना करें, तो उनके वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं. इसके अलावा, पितरों की शांति के लिए किए गए तर्पण और दान-पुण्य से वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।जब बात ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या की हो, तो इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

शुभ योग में मनेगी सोमवती अमावस्या

अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 07 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।
अधिक मास (मलमास) भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस महीने की अमावस्या का महत्व स्वयमेव बढ़ जाता है।
पितृ कृपा: यह अमावस्या विशेष रूप से पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
त्रिगुणी संयोग: इस दिन मिथुन संक्रांति भी मनाई जाएगी, यानी सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
सिद्ध योग: सोमवती अमावस्या के साथ-साथ इस दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘अमृत सिद्धि योग’ का निर्माण हो रहा है। इन शुभ योगों में किए गए किसी भी मंत्र जाप, पूजा या दान का फल अनंत गुना होकर और अति शीघ्र प्राप्त होता है।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12:19 बजे शुरू होगी, 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे समाप्त होगी।उदया तिथि की मान्यता के कारण, सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।
अमावस्या के दिन यानी 15 जून को स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 03 मिनट से सुबह 04 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
अमृत काल: सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

सोमवती अमावस्या पर दान का महत्व

शास्त्रों में अमावस्या के दिन किए गए दान को ‘महादान’ की श्रेणी में रखा गया है। ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या पर दान करने से भगवान विष्णु और पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जल का दान: ज्येष्ठ के महीने में भीषण गर्मी होती है, इसलिए इस दिन सुबह के समय किसी मंदिर में या किसी गरीब/जरूरतमंद को पानी से भरा मटका दान अवश्य करें। सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना भी सर्वोत्तम माना गया है। मान्यता है कि जल दान से सोई हुई किस्मत जाग उठती है।
अन्न और वस्त्र: किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को सत्तू, फल, और अन्न का दान करें। इसके साथ ही सूती वस्त्रों का दान करना भी शुभ होता है।
ग्रीष्म ऋतु की वस्तुएं: गर्मी से राहत दिलाने वाली चीजों जैसे— छाता (छतरी), हाथ का पंखा और जूते-चप्पल का दान करना इस दिन बेहद फलदायी और पुण्यकारी माना जाता है।

सोमवती अमावस्या पर करे उपाय

सोमवती अमावस्या पर धन-धान्य, वैवाहिक सुख और पितरों की शांति के लिए पीपल की पूजा, अन्न-वस्त्र दान और पितृ तर्पण जैसे अचूक उपाय किए जाते हैं。यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है ।
पीपल के पेड़ की पूजा
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में दूध, गंगाजल, काले तिल और चीनी मिला हुआ जल अर्पित करें।
पेड़ के तने पर कच्चा सूत 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करे
पितृ दोष निवारण
पितरों की शांति के लिए दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कौवों, गाय और चींटियों को भोजन (खीर, पूड़ी या चीनी-आटा) खिलाएं।इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
शिवलिंग की पूजा (वैवाहिक सुख के लिए)
सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव का गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
सुहागिनें इस दिन पीपल और बरगद के पेड़ की पूजा करके अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं।

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