मलमास 17 मई से प्रारम्भ होने से मांगलिक कार्यो पर लगेगा विराम
इस वर्ष अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहते हैं,17 मई रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026, सोमवार तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की मलमास इस वर्ष ज्येष्ठ माह में आ रहा है, इसलिए ज्येष्ठ का महीना दो बार यानी दो महीने का होगा। यह अतिरिक्त महीना हर 3 साल में एक बार आता है और पूजा-पाठ, दान व ध्यान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
जिस चंद्र महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती, उसे अधिकमास,पुरुषोत्तम मास या मलमास कहते हैं। सूर्य का संक्रमण नहीं होने से ही अधिमास में विवाहादि, मंगलकार्य वर्जित माने गए हैं।
पुरुषोत्तम मास क्यो होता है
यस्मिन मासे न संक्रांतिः, संक्रांति द्वमेव वा। मलमासः स विज्ञेयो मासे त्रिंशत्तमे भवेत्।।
(ब्रह्मसिद्धांत) जिस मास में भगवान सूर्य का किसी राशि पर भी संक्रमण नहीं होता, वह अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहलाता है, एक ही मास में संक्रांतिद्वय होने पर वह मास क्षय मास कहलाता है।
अधिकमास का वैज्ञानिक कारण
अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) का मुख्य वैज्ञानिक कारण सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच का अंतर है।
सौर वर्ष: पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड लगते हैं।
चंद्र वर्ष: चंद्रमा के 12 चक्करों से बने वर्ष में 354 दिन होते हैं।
11 दिनों का अंतर: इन दोनों वर्षों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर (365 – 354 = 11) रह जाता है।
3 साल में संतुलन: यह 11 दिनों का अंतर हर साल जुड़ते-जुड़ते, लगभग 3 साल में 33 दिनों (32-33 दिन) का एक अतिरिक्त महीना बना देता है। इसलिए वैज्ञानिक समायोजन किया जाता है ।
यदि यह अतिरिक्त मास न जोड़ा जाए, तो हर साल त्यौहार 11 दिन पहले आ जाएंगे और 3-4 साल में त्यौहारों का मौसम पूरी तरह बदल जाएगा (जैसे दिवाली गर्मियों में आ सकती है)। पंचांग के इस अंतर को दूर करने के लिए, हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, ताकि वर्ष और ऋतुओं का संतुलन बना रहे।
