13 वर्षों बाद शनि जयंती शनिवार को पड़ेगी
शनि जयंती 16 मई (शनिवार) को मनाई जाएगी। यह ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को पड़ती है और इस दिन शनि अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए हर वर्ष इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है।उदयातिथि के अनुसार, 16 मई को ही पूजा और दान-पुण्य करना सबसे शुभ माना गया है।
ज्योतिषियों के अनुसार, शनि जयंती पर शनिवार का संयोग लगभग 13 वर्षों बाद बन रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिष शास्त्र में शनिवार और शनि जयंती का एक साथ पड़ना बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग माना जाता है।
शनिदेव के जन्मोत्सव वाले दिन शनि की साढ़े साती, ढैय्या अथवा अशुभ प्रभावों से परेशान लोगों को उनकी स्तुति करनी चाहिए। श्रद्धा से किए गए उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना प्रबल हो जाती है।
शनि जयंती पर बनेगे शुभ योग
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन खास है, क्योंकि सुबह से लेकर 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।इसके बाद 10 बजकर 26 मिनट से शोभन योग शुरू होगा, जो पूरी रात तक रहेगा और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय प्रदान करेगा।
शनि जयंती पर पूजा मुहूर्त
शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय सुबह 5:30 बजे होगा।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 बजे से 4:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
शनिदेव की पूजा के लिए विशेष शुभ समय: सुबह 7:19 बजे से 8:59 बजे तक
वट सावित्री व्रत 16 मई को, वट वृक्ष की करेगी पूजा सुहागिन महिलाये
वट सावित्री व्रत 16 मई को अमावस के दिन रखा जाएगा।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण और पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखकर वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।
वट सावित्री व्रत पूजा शुभ मुहूर्त
इस बार अमावस्या तिथि 16 मई, शनिवार को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर लगेगी और रात में 1 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। यानी 16 मई को ही वट सावित्री का व्रत किया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का रहेगा। सुहागिन महिलाएं 16 मई को सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकती हैं।
वट सावित्री पूजा महत्व
माना जाता है कि बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। ऐसे में इसके नीचे बैठकर पूजा और परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। वहीं, इस बार वट सावित्री व्रत पर शनि जयंती व शनि अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। जिसके चलते यह तिथि और भी खास रहेगी।
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष के पास माता सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा रखें।
इसके बाद एक साफ लोटे में जल लेकर वृक्ष की जड़ों में अर्पित करें।
इस दौरान कुछ फूल भी वट वृक्ष के पास रखें और अक्षत, रोली और भीगे हुए चने भी अर्पित करें।
अब कुछ मौसमी फल लेकर वट वृक्ष के पास रखें और धूपबत्ती जला लें।
इसके बाद वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें।
वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें और सभी बड़ों का आशीर्वाद लें।
अंत में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा करें और व्रत से जुड़े नियमों का पालन करें।
